उन का दावा है कि ग़ लत तरीके से इकरार-नामा कराकर पहनई ज़मीन पर विश्ववाणी नाम से चर्च बनवा दिया गया. इन महिलाओं का कहना था कि ईसाई धर्म या किसी शख़्स से कोई गिला-शिकवा नहीं है, लेकिन भोले आदिवासियों को बरगलाने का काम ईसाइयों के धर्म गुरु और प्रचारक कई तरीकों से करते रहे हैं. अब आदिवासियों को यह अहसा स होने लगा है कि उनकी ज़मीन भी जा रही है और सरना धर्म भी ख़तरे में है. शुरुआत कैसे हुई ? आंचू मुंडा गढ़खटंगा के पाहन (आदिवासी पुजारी) रहे हैं. वो बताते हैं कि चार साल पहले चर्च का निर्माण कराए जाने के बाद से ही ग्रामीण इ सके विरोध में गोलबं द होने लगे थे. दरअसल पहन ई ज़मीन का हस्तां तरण नहीं किया जा सकता. गांव के लोग बताने लगे कि इस मामले को लेकर सदर अनुमंडलाधिकारी की कोर्ट में दायर वाद पर सुनवाई हुई थी. आंचू मुंडा समेत तीन लोग पहले पक्षमें थे जबकि चर्च के अमरदीप बोदरा समे त तीन लोग दूसरा पक्ष में शामिल थे. आंचू मुंडा का पक्ष था कि ग़लत तरीके से इकरार- नामा कराकर पहनई ज़मीन पर च र्च बनवाया गया है. तब सदर अनुमंडलाधिका री ने भी अपने फ़ैस ले में ज़मीन के हस्तांतरण को छोटानागप...